Ad1

S160, ध्यान योग से विहीन जीवन पशु समान है

     प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के हिंदी प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर S160, इसमें ध्यान योग की विशेषताओं का वर्णन करते हुए कहते हैं कि अगर मनुष्य में ध्यान योग करने का ज्ञान नहीं है, तो वह पशु के समान है। ध्यान योग में सफलता पाने के लिए सत्संग आपका सबसे बड़ा सहायक है। सत्संग के बिना ईश्वर भक्ति का ज्ञान नहीं होता है और मनुष्य पशु के जैसा जीवन बिताने पर विवस होता है । इसलिए सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज कहते हैं ईश्वर भक्ति विहीन जीवन पशु के समान है। भजन गाना ही ईश्वर भक्ति नहीं है। ईश्वर भक्ति करने के लिए योग साधना करनी चाहिए। ध्यान योग क्या है ? योग कैसे करें? ईश्वर का सरुप कैसा है? आदि बातों की जानकारी के लिए आगे कहते हैंं -

सद्गुरु महर्षि मेंही प्रवचन करते हुए
सद्गुरु महर्षि मेंही प्रवचन करते हुए


ईश्वर भक्ति के लिए ध्यान योग करें
ईश्वर भक्ति के लिए ध्यान योग करें

ध्यान योग कैसे करें
ध्यान योग कैसे करें

    प्रभु प्रेमियों ! सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज के इस प्रवचन में आपने जाना कि ध्यान योग कैसे करें? ईश्वर का स्वरुप कैसा है? ध्यान योग बिहीन जीवन पशु के समान किस तरह है? मनुष्य जीवन का परम कर्तव्य क्या है?  ईश्वर-भक्ति करने के लिए ध्यान योग जरुरी है और ध्यान योग कैसे करें ? जिन लोगों को उपर्युक्त चित्र से गुरु महाराज के प्रवचन पढ़ने में दिक्कत हो रही है उनसे निवेदन है कि वह निम्नोक्त वीडियो देखें-


S160, ध्यान योग से विहीन जीवन पशु समान है S160, ध्यान योग से विहीन जीवन पशु समान है Reviewed by सत्संग ध्यान on 11/29/2017 Rating: 5

कोई टिप्पणी नहीं:

प्रभु प्रेमियों! कृपया वही टिप्पणी करें जो सत्संग ध्यान कर रहे हो और उसमें कुछ जानकारी चाहते हो अन्यथा जवाब नहीं दिया जाएगा।

संतमत और बेदमत एक है, कैसे? अवश्य जाने

     प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज ने यह सि...

Ad

Blogger द्वारा संचालित.