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S250, (क) पंच पापों को छोड़ दीजिए, नहीं तो ईश्वरीय सजा से नहीं बचेंगे।

      प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर S250 वां, में  बताया गया है कि मैं ईश्वर भक्ति कराकर,देश की जड़ को मजबूत करता हूं । कुछ लोग गुरु महाराज से कहने लगे थे कि- आप कहते हैं, ध्यान करो, ध्यान करो, इससे क्या होगा? ध्यान कराकर इस देश की कौन सी भलाई होगी? इस पर गुरु महाराज ने कहने की कृपा की, वह सारा प्रसंग आप इस प्रवचन में सुनें, पढ़ें

प्रवचन चित्र एक
प्रवचन चित्र एक


प्रवचन चित्र 3
प्रवचन चित्र 3

प्रवचन चित्र दो
प्रवचन चित्र दो

   प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि  मैं ईश्वर भक्ति कराकर,देश की जड़ को मजबूत करता हूं   । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। इस प्रवचन के शेष भाग को पढ़ने के लिए        यहां दबाएं ‌।


S250, (क) पंच पापों को छोड़ दीजिए, नहीं तो ईश्वरीय सजा से नहीं बचेंगे। S250, (क) पंच पापों को छोड़ दीजिए, नहीं तो ईश्वरीय सजा से नहीं बचेंगे। Reviewed by सत्संग ध्यान on 7/28/2018 Rating: 5

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