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S09, (ख) Means of Moksha, Need for Moksha/सत्संग ध्यान

महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" /09

      प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर 09 वां, भारत देश के, यूं.पी. प्रांत के मुरादाबाद जिलांतर्गत संतमत सत्संग मंदिर मुरादाबाद में आयोजित निर्वाण दिवस के सत्संग कार्यक्रम में दिनांक- 21-01-1951 ई. को  हुआ था।   --पूज्यपाद स्वामी श्री संतसेवी जी महाराज   ।
     इस संतमत प्रवचन में आप जानेंगे-- मोक्ष के लिए ध्यानाभ्यास आवश्यक,मोक्ष,मोक्ष प्राप्ति के साधन,मोक्ष की आवश्यकता,सत्संग प्रचार,सत्संग का प्रचार,ज्ञान का प्रचार भी करना चाहिए,सत्संग क्या है, संतमत क्या है,सत्संग की महिमा,अखिल भारतीय संतमत सत्संग,सत्संग प्रवचन कथा,स्वावलंबी जीवन,स्वावलंबन चे महत्व,स्वावलंबन पर कहानी,स्वावलंबन का अर्थ हिंदी में,स्वावलंबी होना अर्थ,लालची कहानी,लालची राजा की कहानी,बच्चों की कहानियां,लालची वाली कहानी,यह शरीर संसार रुपी सराय की संपत्ति है, ध्यान का सही तरीका, आदि के बारे में।

S09, (ख) Means of Moksha, Need for Moksha/सत्संग ध्यान। बाबा देवी साहब के संस्मरण
बाबा देवी साहब के संस्मरण

Means of Moksha, Need for Moksha

सदगुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज कहते हैं कि- सत्संग का प्रचार-प्रसार कैसे करना चाहिए ? सत्संग क्या है ? संतमत क्या है? इस पर भी चर्चा होना चाहिए। कैसा भी मनुष्य हो ध्यान अवश्य करें । स्वाबलंबी जीवन के लिए कोई काम अवश्य करना चाहिए। 40 साल तक कमाना चाहिए। लालची राजा की कथा का दृष्टांत देते हुए कहते हैं कि मनुष्य कम इच्छा रखकर, संतोषी बनके संसार से छूटने का, मुक्ति पाने का उपाय कर सकता है । शरीर और संसार में समानता है। मोक्ष प्राप्ति की क्या-क्या बातें हैं? जब ध्यान कैसे करना चाहिए? उसका सही तरीका क्या है? पूरी जानकारी के लिए इस प्रवचन को पूरा पढें-

S09, (ख) Means of Moksha, Need for Moksha/सत्संग ध्यान। बाबा साहब के संस्मरण प्रवचन चित्र एक
बाबा साहब के संस्मरण प्रवचन चित्र एक

S09, (ख) Means of Moksha, Need for Moksha/सत्संग ध्यान। बाबा साहब के संस्मरण प्रवचन चित्र दो
बाबा साहब के संस्मरण प्रवचन चित्र दो

S09, (ख) Means of Moksha, Need for Moksha/सत्संग ध्यान। बाबा साहब के संस्मरण प्रवचन चित्र 3
बाबा साहब के संस्मरण प्रवचन चित्र 3

S09, (ख) Means of Moksha, Need for Moksha/सत्संग ध्यान। बाबा साहब के संस्मरण प्रवचन चित्र 4
बाबा साहब के संस्मरण प्रवचन चित्र 4

S09, (ख) Means of Moksha, Need for Moksha/सत्संग ध्यान। बाबा साहब के संस्मरण प्रवचन समाप्त
बाबा साहब के संस्मरण प्रवचन समाप्त

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प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि   स्वावलंबन का अर्थ हिंदी में,स्वावलंबी होना अर्थ,लालची कहानी,लालची राजा की कहानी,बच्चों की कहानियां,लालची वाली कहानीइतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का संका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का  सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।


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S09, (ख) Means of Moksha, Need for Moksha/सत्संग ध्यान S09, (ख) Means of Moksha, Need for Moksha/सत्संग ध्यान Reviewed by सत्संग ध्यान on 7/06/2018 Rating: 5

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