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S096, संत वाणी का अर्थ कौन कर सकता है?-महर्षि मेंही

     प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के हिंदी प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर S096, इसमें  बताया गया है कि संतवाणी का अर्थ कैसे किया जाना चाहिए । उसके लिए क्या योग्यता है ? क्या हर कोई संत वाणी का अर्थ कर सकता है ? संतवाणी बहुत ही गंभीर एवं साधना परक वानियां होती हैं। जिसके बारे में गुरु महाराज कहते हैं--

गुरुदेव निवास
गुरुदेव निवास



संतवाणी का अर्थ पर चर्चा
संतवाणी का अर्थ पर चर्चा

     प्रभु प्रेमियों! संत कबीर साहब की वाणी के बारे में प्रचलित है- " कबीर की वाणी बूझै, तो तीनों लोक सूझै। कबीर का गाया गावै, तो अजब का धक्का खबै।"
संतवाणी का अर्थ अत्यंत गंभीर होते हैं । जैसे हम किसी को कहते हैं कि वह गधा है, लेकिन वह मनुष्य होता है। हम उसके आचरण को देखते हुए उसको गधा की संज्ञा देते हैं । तो यहां वह विशेष अर्थ का बाचक   हुआ। इसी तरह संतवाणी का विशेष अर्थ  होता है जिसे समझाने के लिए गुरु महाराज आगे कहते हैं-



     प्रभु प्रेमियों ! सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज का यह प्रवचन संत वाणी के अर्थ के पर था । जो बड़ा ही महत्वपूर्ण है । हम आशा करते हैं आप गुरु महाराज के प्रवचन से अच्छी तरह समझ गए होंगे कि संत वाणी का अर्थ है करना कितना आसान और कठिन है। जय गुरु। जिन प्रभु प्रेमियों! को उपर्युक्त चित्र पढ़ने में दिक्कत हो रही हो, उनसे निवेदन है कि वह हमारा निम्नोक्त वीडियो देखें-


     
     प्रभुु प्रेमियों! हम आशा करतेे हैं आप संतवाणी के अर्थ के बारे में जो आपकेेे मन मेंं शंका होगा, उसका समाधान हो गयाा होगा?
S096, संत वाणी का अर्थ कौन कर सकता है?-महर्षि मेंही S096, संत वाणी का अर्थ कौन कर सकता है?-महर्षि मेंही Reviewed by सत्संग ध्यान on 11/30/2017 Rating: 5

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