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S237, महर्षि मेंही प्रवचन, प्रेरक प्रसंग एवं संस्मरण का संगम --महर्षि मेंहीं

प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर  S237, इसमें  बताया गया है कि भगवान प्रेम के वशीभूत होकर तुरंत दर्शन दे देते हैं । इसके साथ ही कुछ अन्य बातों की भी चर्चा हुई है जैसे- प्रेरक प्रसंग एवम् गुरु महाराज के संस्मरण के बारे में । बिना प्रमाण के किसी की बात को मत मानो

प्रवचन चित्र एक
प्रवचन चित्र एक


प्रवचन चित्र दो
प्रवचन चित्र दो

प्रवचन समाप्त
प्रवचन समाप्त

     प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि भगवान प्रेम के वशीभूत होकर तुरंत दर्शन दे देते हैं । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का संका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।


S237, महर्षि मेंही प्रवचन, प्रेरक प्रसंग एवं संस्मरण का संगम --महर्षि मेंहीं S237, महर्षि मेंही प्रवचन, प्रेरक प्रसंग एवं संस्मरण का संगम --महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on 7/21/2018 Rating: 5

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