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S322, संतवाणी, वेद-उपनिषद, गीता आदि का ज्ञान ध्यान करना है -महर्षि मेंहीं

प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर S322, इसमें  बताया गया है कि संतवाणी, वेद-उपनिषद, गीता आदि का ज्ञान ध्यान करना है। भारत में ध्यान करना, योग करना प्राचीन काल से चला आ रहा है।  यह ध्यान कैसे कर सकते हैं? वह तुरीय अवस्था क्या है? तुरियातीता अवस्था क्या है? चौथी अवस्था क्या है? इन बातों की जानकारी इस प्रवचन में दिया गया है

पूज्यपाद गुरुदेव
पूज्यपाद गुरुदेव



प्रवचन चित्र 1
प्रवचन चित्र 1


प्रवचन चित्र दो
प्रवचन चित्र दो

प्रवचन समाप्त
प्रवचन समाप्त
     प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि  संतवाणी, वेद-उपनिषद, गीता आदि का ज्ञान ध्यान करना है । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का संका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।


S322, संतवाणी, वेद-उपनिषद, गीता आदि का ज्ञान ध्यान करना है -महर्षि मेंहीं S322, संतवाणी, वेद-उपनिषद, गीता आदि का ज्ञान ध्यान करना है -महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on 7/07/2018 Rating: 5

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