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S434, सांप्रदायिक झड़पें और संतमत के मौलिक विचार -महर्षि मेंहीं

महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" /  434

       प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर 434 वां,इसमें बताया गया है कि  सांप्रदायिक पंथों के नाम और संतमत के मौलिक विचार एक है। 

S434, सांप्रदायिक झड़पें और संतमत के मौलिक विचार -महर्षि मेंहीं।। पूज्यपाद गुरुदेव और भक्तजन
पूज्यपाद गुरुदेव और भक्तजन




सांप्रदायिक झड़पें और संतमत

     संतो के नाम पर रखे गए पंथों के नाम भिन्न-भिन्न इसलिए है कि ये नाम उनके प्रेमी लोगों ने रखें है। संतमत बिल्कुल शुद्ध और एक है । जो एक ईश्वर की भक्ति करने की प्रेरणा देता है और ईश्वर-भक्ति की ऊंचाइयों को प्राप्त किए हुए होता है।

प्रवचन चित्र एक
प्रवचन चित्र एक
प्रवचन चित्र दो
प्रवचन चित्र दो

प्रवचन समाप्त
प्रवचन समाप्त

     प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि  सांप्रदायिक पंथों के नाम और संतमत के मौलिक विचार एक है  । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।

    

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S434, सांप्रदायिक झड़पें और संतमत के मौलिक विचार -महर्षि मेंहीं S434, सांप्रदायिक झड़पें और संतमत के मौलिक विचार -महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on 9/03/2018 Rating: 5

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