महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" /20
प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर 20 वां, भारत देश के, बिहार राज्य के भागलपुर जिलांतर्गत दयालपुर ग्राम में हुए संतमत सत्संग कार्यक्रम में दिनांक- 11-05-1952 ई. को काल हुआ था।--पूज्यपाद स्वामी श्री संतसेवी जी महाराज ।
इस संतमत प्रवचन में आप जानेंगे--मनुष्य शरीर की उपादेयता,मानव शरीर की उपयोगिता,मानव-जीवन की महानता एवं उपयोगिता,मानव शरीर रचना विज्ञान,ध्यान अभ्यास कैसे करें,विश्व ब्रह्मांड,ब्रह्मांड की संरचना, ब्रह्माण्ड का अर्थ,ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति का सिद्धांत, आध्यात्मिक साधना से तृप्ति,आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष जानकारी,आध्यात्मिक उन्नति,आध्यात्मिक स्तर,आध्यात्मिक उन्नति के लक्षण,आध्यात्मिक सिद्धांत,साधना की परिभाषा, आध्यात्मिक यात्रा आदि के बारे में।
शरीर और संसार में समानता पर उपदेश देते गुरुदेव |
Equality and spiritual practice in human body and world universe
सदगुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज कहते हैं कि-- आध्यात्मिक दृष्टि से मनुष्य शरीर की बनावट और विश्व ब्रह्मांड में समानता है। इसको समझने और प्रत्यक्ष करने के लिए आध्यात्मिक साधना की आवश्यकता होती है । अंतर साधन में आंख बंद करके देखने पर प्रकाश और शब्द मिलता है। इस बात की पुष्टि बड़े-बड़े संतों और वेद-उपनिषदों में भी है । अनेक तरह के विघ्नों को पार करते हुए जो साधक प्रकाश और शब्द साधना में सफलता प्राप्त करता है, वह ब्रह्मा, विष्णु और महेश की तरह शक्ति संपन्न होते हुए अंत में परमात्मा ही हो जाता है। इन बातों को बिशेष रूप से जानने के लिए इस प्रवचन को पूरा पढें--
शरीर व संसार में समानता और साधना प्रवचन चित्र एक |
शरीर व संसार में समानता और साधना प्रवचन चित्र दो |
शरीर व संसार में समानता और साधना प्रवचन चित्र 3 |
शरीर व संसार में समानता और साधना प्रवचन समाप्त |
प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि आध्यात्मिक साधना से तृप्ति, आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष जानकारी, आध्यात्मिक उन्नति, आध्यात्मिक स्तर, आध्यात्मिक उन्नति के लक्षण, आध्यात्मिक सिद्धांत,साधना की परिभाषा, आध्यात्मिक यात्रा आदि बारे में। इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का संका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। उपर्युक्त प्रवचन का पाठ निम्न वीडियो में किया गया है।
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जय गुरु।
S20, Equality and spiritual practice in human body and world universe -महर्षि मेंहीं अमृतवाणी
Reviewed by सत्संग ध्यान
on
9/12/2019
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