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S371, मूर्ख और विद्वान में अंतर तथा ईश्वर भक्ति -सद्गुरु महर्षि मेंहीं

प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर  S371, इसमें  बताया गया है  कि  मूर्ख और विद्वान में क्या अंतर है तथा ईश्वर भक्ति करने के लिए सबसे पहले किस मंत्र का जाप करना चाहिए । लोग बहुत बातें कहते हैं पर करते नहीं हैं, तो वह बेकार है, वही मूर्ख है या जानवर है। अथवा बहुत जानकारी होने पर भी उसके अनुसार आचरण नहीं रहने के कारण वह जानवर के जैसा ही है जो केवल ज्ञान का बोझ ढोता है

शांति संदेश
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प्रवचन चित्र 1
प्रवचन चित्र एक

प्रवचन चित्र दो
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प्रवचन समाप्त
प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि  मूर्ख और विद्वान में क्या अंतर है तथा ईश्वर भक्ति करने के लिए सबसे पहले किस मंत्र का जाप करना चाहिए । लोग बहुत बातें कहते हैं पर करते नहीं हैं, तो वह बेकार है, वही मूर्ख है या जानवर है  । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का संका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।


S371, मूर्ख और विद्वान में अंतर तथा ईश्वर भक्ति -सद्गुरु महर्षि मेंहीं S371, मूर्ख और विद्वान में अंतर तथा ईश्वर भक्ति  -सद्गुरु महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on 5/26/2018 Rating: 5

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