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S48, खानपान का प्रभाव मन पर पड़ता है। --सद्गुरु महर्षि मेंहीं

"महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" / 48

     प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर 153 वां, में  बताया गया है कि  खानपान का प्रभाव मन पर पड़ता है। 


कर्तव्य पथ पर गुरुदेव
कर्तव्य पथ पर गुरुदेव


 खानपान का प्रभाव मन पर पड़ता है।

     जैसा खाए अन्न, वैसा होए मन। जैसा पियें पानी,  वैसा बोलै-बानी। यह कहावत बहुत प्रसिद्ध है इसके इसके अनुसार खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए खान पान के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहिए। अगर आप खान पान के बारे में जानना चाहते हैं तो निम्न प्रवचन चित्रों को पढें-


प्रवचन चित्र एक
प्रवचन चित्र एक
      यहां गुरु महाराज एक बात और बताते हैं कि हम जैसा भोजन करते हैं, वैसी मानसिक स्थिति में कुछ ऐसे कर्म कर देते हैं। जिसका परिणाम हमें अवश्य भोगना पड़ता है । जैसे- 'शराब के नशे में कुछ अनुचित कर देना और उसका परिणाम जीवन भर भोगना।'

प्रवचन चित्र दो
प्रवचन चित्र दो
      हमारी मानसिक स्थिति कई कारणों से प्रभावित होती रहती है, जिनमें एक भोजन है दूसरी संगति का प्रभाव है। जैसा संग करते हैं उसका भी प्रभाव तुरंत पड़ता है । किसी हंसते हुए व्यक्ति के पास जाने से मन प्रसन्न हो जाता है और रोने वाले के पास जाने से मन दुखित हो जाता है।

प्रवचन समाप्त
प्रवचन समाप्त
     जीवन में बहुत काम सोच समझ कर और सावधानीपूर्वक करना पड़ता है इसलिए हमेशा अलर्ट और तैयार रहने के लिए मानसिक एकाग्रता बहुत जरूरी है जो ध्यान से प्राप्त होता है।

प्रेरक प्रसंग
प्रेरक प्रसंग


     प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि  खानपान का प्रभाव मन पर पड़ता है । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।


S48, खानपान का प्रभाव मन पर पड़ता है। --सद्गुरु महर्षि मेंहीं S48,  खानपान का प्रभाव मन पर पड़ता है। --सद्गुरु महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on 8/10/2018 Rating: 5

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