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S258, ध्यानाभ्यास कुप्पाघाट/गुरु महाराज का pravachan/माया वर्णन

महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" /258

       प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर 258 वां,इसमें माया के बारे में बताया गया है ।





माया वर्णन

     इस संतमत प्रवचन में  बताया गया है कि-संसार में माया का प्रसार किस तरह से होता है? लोग माया में क्यों फंसे रहते हैं ? संसार को माया में फंसा रखने के लिए एक बहुत बड़ा कार्यक्रम चल रहा है। उसमें सेनापति और बड़े-बड़े योद्धा हैं, जो इस काम को अंजाम देते हैं । जिसके कारण से जीव परमात्मा की और नहीं जा पाता है। इससे कैसे बचा जा सकता है ?

भक्ति बीज का परिणाम
भक्ति बीज का परिणाम

S258, ध्यानाभ्यास कुप्पाघाट/गुरु महाराज का  pravachan/माया वर्णन। माया वर्णन
माया वर्णन

S258, ध्यानाभ्यास कुप्पाघाट/गुरु महाराज का  pravachan/माया वर्णन। प्रवचन समाप्त
प्रवचन समाप्त

      प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि  -संसार में माया का प्रसार किस तरह से होता है? लोग माया में क्यों फंसे रहते हैं ? इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।


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S258, ध्यानाभ्यास कुप्पाघाट/गुरु महाराज का pravachan/माया वर्णन S258, ध्यानाभ्यास कुप्पाघाट/गुरु महाराज का  pravachan/माया वर्णन Reviewed by सत्संग ध्यान on 11/04/2018 Rating: 5

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