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S375, बहुत बातें कहने सुनने की अपेक्षा जप और ध्यान कीजिए -महर्षि मेंहीं

प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर  S375, इसमें  बताया गया है  कि बहुत बातें कहने सुनने की अपेक्षा  जप और ध्यान कीजिए ।  लोग सत्संग में जाते हैं सत्संग की बातों को सुनते हैं, समझते हैं, सत्संग की बातों को अच्छा बताते हैं। अच्छा समझते हैं लेकिन उसके अनुसार आचरण नहीं करना चाहते। समय आने पर उन बातों को दरकिनार करके मनमानी करने लगते हैं । इसीलिए गुरु महाराज स्पष्ट रूप से इस प्रवचन में कहते हैं कि ज्यादा कहने सुनने के अपेक्षा करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

सिंहासन पर विराजित गुरुदेव एवं भक्तों
सिंहासन पर विराजित गुरुदेव एवं भक्तों


प्रवचन चित्र
प्रवचन चित्र

संतवाणी अर्थ सहित
संतवाणी अर्थ सहित

     प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि बहुत बातें कहने सुनने की अपेक्षा  जप और ध्यान कीजिए । । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का संका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।


S375, बहुत बातें कहने सुनने की अपेक्षा जप और ध्यान कीजिए -महर्षि मेंहीं S375, बहुत बातें कहने सुनने की अपेक्षा  जप और ध्यान कीजिए -महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on 5/24/2018 Rating: 5

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