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S112,(ग) संतमत सत्संग का आधार- ईश्वर भक्ति में नादानुसंधान पर बिशेष -महर्षि मेंहीं

प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर  S112, इसमें  बताया गया है  कि संतमत सत्संग का आधार- ईश्वर भक्ति में नादानुसंधान पर बिशेष चर्चा। संतमत सत्संग का आधार है ग्रंथपाठ। ग्रंथ पाठ के आधार पर ही बक्तालोग कुछ विशेष चर्चा करते हैं । विशेष चर्चा में ईश्वर भक्ति मुख्य है। वह ईश्वर-भक्ति कैसा है? स्थूल रूप में, सगुण रूप में और निर्गुण रूप में ईश्वर भक्ति का स्वरूप क्या है? ईश्वर को प्राप्त करने के लिए निर्गुण स्वरूप में नादानुसंधान अत्यावश्यक साधन है। नादानुसंधान साधना कैसे करें ? नादानुसंधान क्या है ? इन बातों पर भी कुछ चर्चा है। इस प्रवचन के पहले भाग अर्थात दूसरा भाग को पढ़ने के लिए      यहां दवाएं
गुरु महाराज
 गुरु महाराज


प्रवचन चित्र 5
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प्रवचन समाप्त
प्रवचन समाप्त

     प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि  संतमत सत्संग का आधार- ईश्वर भक्ति में नादानुसंधान पर बिशेष चर्चा। संतमत सत्संग का आधार है ग्रंथपाठ। ग्रंथ पाठ के आधार पर ही बक्तालोग कुछ विशेष चर्चा करते हैं ।   । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का संका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। इस प्रवचन के पहले भाग को पढ़ने के लिए       यहां दवाएं


S112,(ग) संतमत सत्संग का आधार- ईश्वर भक्ति में नादानुसंधान पर बिशेष -महर्षि मेंहीं S112,(ग) संतमत सत्संग का आधार- ईश्वर भक्ति में नादानुसंधान पर बिशेष -महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on 6/18/2018 Rating: 5

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