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S123, गुरु महाराज का प्रवचन हिंदी में pravachan123, साहेबगंज दि. 05-08-1955 ई.

महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" / 123

      प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर 123 वां,इसमें बताया गया है कि
 संतों का मार्ग मोक्ष का मार्ग है, संसार में संयम से रहते हुए भोग विलास में न फंसते हुए मोक्ष के कार्य में लगे रहना चाहिए

ध्यान मुद्रा में गुरुदेव
ध्यान मुद्रा में गुरुदेव



संतों का मार्ग मोक्ष का मार्ग है
       इस प्रवचन में पायेंगे सदगुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज बताते हैं- संतों का मार्ग मोक्ष का मार्ग है, संसार में संयम से रहते हुए भोग विलास में न फंसते हुए मोक्ष के कार्य में लगे रहना चाहिए। 

मोक्ष का अर्थ।
मोक्ष का अर्थ

     मोक्ष प्राप्ति के लिए बात को संत लोग बताते रहते हैं। इसीलिए सत्संग होता है। सत्संग में ईश्वर-भक्ति के द्वारा मोक्ष प्राप्ति के बारे में बताया जाता है। 


मुक्ति कैसे मिलेगी
मुक्ति कैसे मिलेगी

 ईश्वर-भक्ति जप साधन से शुरू करना चाहिए और नादानुसंधान पर इसकी समाप्ति होती है।


नादानुसंधान किसे कहते हैं?
नादानुसंधान किसे कहते हैं?

     प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि संतों का मार्ग मोक्ष का मार्ग है   इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।

   
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S123, गुरु महाराज का प्रवचन हिंदी में pravachan123, साहेबगंज दि. 05-08-1955 ई. S123,   गुरु महाराज का प्रवचन हिंदी में pravachan123, साहेबगंज दि. 05-08-1955 ई. Reviewed by सत्संग ध्यान on 10/08/2018 Rating: 5

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