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S24, The words of destiny, mind, and the attainment of divine vision and the liberation -महर्षि मेंहीं

महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" /24

      प्रभु प्रेमियों ! संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर 24 वां, भारत देश के, बिहार राज्य के कटिहार जिलांतर्गत संतमत सत्संग मंदिर, मनिहारी में सत्संग कार्यक्रम में दिनांक- 18-10-1952 ई. को  अपराह्न काल में हुआ था। --पूज्यपाद स्वामी श्री संतसेवी जी महाराज   ।
इस संतमत प्रवचन में आप जानेंगे--मन और चित्त में क्या अंतर है,चित्त की परिभाषा,चित्त की भूमिका क्या है, चित्त का अर्थ हिंदी में, चित्त ज्ञान पर टिप्पणी,वृतियां क्या है,चित्त की वृत्तियाँ क्या है,विदेह मुक्ति और प्रारब्ध कर्म,प्रारब्ध क्या है और अपना भाग्य कैसे बदलना है,ध्यान के द्वारा कर्म से निपटने का रहस्य,प्रारब्ध किसे कहते है,प्रारब्ध और पुरुषार्थ,प्रारब्ध का मतलब,प्रारब्ध का अर्थ क्या है,DivyaDrishti,दिव्यदृष्टि प्राप्त करने का मंत्र,दिव्य दृष्टि प्राप्ति मंत्र,दिव्य दृष्टि देखने का मंत्र,दिव्य दृष्टि प्राप्त करने का मंत्र, आदि के बारे में

S24, The words of destiny, mind, and the attainment of divine vision and the liberation -महर्षि मेंहीं। दिव्य दृष्टि पर बोलते हुए गुरुदेव
दिव्य दृष्टि पर बोलते हुए गुरुदेव

प्रारब्ध, चित्त की वृत्तियाँ और दिव्य दृष्टि की प्राप्ति व विदेहमुक्ति की बातें

सदगुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज कहते हैं कि--चित किसे कहते हैं? चित का क्या काम है? जीवन मुक्त कौन है? विदेह मुक्ति और प्रारब्ध कर्म क्या है? मोक्ष का प्रयोजन क्या है? एक तत्त्व के दृढ़ अभ्यास से चित्त छय होगा, रुकेगा। दिव्य दृष्टि की प्राप्ति होगी और दुखों से छुटकारा मिलेगा। इसके लिए क्या-क्या साधन जरुरी है । इन बातों को बिशेष रूप से जानने के लिए इस प्रवचन को पूरा पढें-

S24, The words of destiny, mind, and the attainment of divine vision and the liberation -महर्षि मेंहीं। अध्यात्मिक साधना और दृष्टि प्रवचन चित्र एक
अध्यात्मिक साधना और दिव्य दृष्टि प्रवचन चित्र एक

S24, The words of destiny, mind, and the attainment of divine vision and the liberation -महर्षि मेंहीं। अध्यात्मिक साधना और दिव्य दृष्टि प्रवचन चित्र दो
अध्यात्मिक साधना और दिव्य दृष्टि प्रवचन चित्र दो

S24, The words of destiny, mind, and the attainment of divine vision and the liberation -महर्षि मेंहीं। अध्यात्मिक साधना और दिव्य दृष्टि प्रवचन समाप्त
अध्यात्मिक साधना और दिव्य दृष्टि प्रवचन समाप्त

प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि विदेह मुक्ति और प्रारब्ध कर्म,प्रारब्ध क्या है और अपना भाग्य कैसे बदलना है,ध्यान के द्वारा कर्म से निपटने का रहस्य,प्रारब्ध किसे कहते है,प्रारब्ध और पुरुषार्थ,प्रारब्ध का मतलब,प्रारब्ध का अर्थ क्या है,DivyaDrishti आदि बारे में। इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का संका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का  सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। उपर्युक्त प्रवचन का पाठ निम्न वीडियो में किया गया है।



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जय गुरु।

S24, The words of destiny, mind, and the attainment of divine vision and the liberation -महर्षि मेंहीं S24, The words of destiny, mind, and the attainment of divine vision and the liberation -महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on 9/15/2019 Rating: 5

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