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S78, (ख) सरलता से समझें, ईश्वर के स्वरुप को --सद्गुरु महर्षि मेंही

प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर S78, इसमें  बताया गया है कि  सरलता से समझें, ईश्वर के स्वरुप को ।  ईश्वर दर्शन इसलिए चाहिए कि आपको किसी तरह की भूख न रह जाय, जिससे आपको कष्ट हो। आप उस मूल पुरुष को पाइयेगा, जिसको पाकर कभी वह छुटेगा नहीं। उसके छूटने का गुण आपमें नहीं होगा। यही ब्रह्म निर्वाण है। इस प्रवचन के पहले भाग को पढ़ने के लिए      यहां दवाएं
प्रसन्न मुद्रा में गुरुदेव
प्रसन्न मुद्रा में गुरुदेव


प्रवचन चित्र 3
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प्रवचन चित्र 4
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     प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचनांश का पाठ करके आपलोगों ने उदाहरण के साथ ईश्वर का  स्वरूप कैसा है  । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का संका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।
यह प्रवचन का दूसरा भाग है । तीसरा भाग पढ़ने के लिए       यहां दबाएं


S78, (ख) सरलता से समझें, ईश्वर के स्वरुप को --सद्गुरु महर्षि मेंही S78, (ख) सरलता से समझें, ईश्वर के स्वरुप को --सद्गुरु महर्षि मेंही Reviewed by सत्संग ध्यान on 5/22/2018 Rating: 5

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