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S59, सावधान ! मरने के समय अच्छी भावना (ध्यान-भजन) बनी रहे, - महर्षि मेंही

प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर S59, इसमें  बताया गया है कि  सत्संग करने का उद्देश्य क्या है ? हम लोग सत्संग क्यों करते हैं ? सत्संग करने से क्या लाभ है ? लोग एक जगह इकट्ठे होकर, सभा का आयोजन कर ईश्वर, जीव, भगवान, संसार आदि बातों की चर्चा करते हैं। इन बातों का सार क्या है?  हम लोग सत्संग इसलिए करते हैं कि ईश्वर भक्ति की प्रेरणा मिले, ईश्वर भक्ति से सभी दुखों नाश होता है। सत्संग वही उचित है जिस सत्संग में ईश्वर भक्ति की प्रेरणा मिले और आंतरिक सत्संग या ध्यान करने की इच्छा  जागै। 

शांति संदेश
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प्रवचन चित्र
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प्रवचन समाप्त
प्रवचन समाप्त

     प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि  सत्संग करने का उद्देश्य क्या है ? हम लोग सत्संग क्यों करते हैं  । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का संका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।


S59, सावधान ! मरने के समय अच्छी भावना (ध्यान-भजन) बनी रहे, - महर्षि मेंही S59, सावधान ! मरने के समय अच्छी भावना (ध्यान-भजन) बनी रहे, - महर्षि मेंही Reviewed by सत्संग ध्यान on 7/20/2018 Rating: 5

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