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S85, (ख) संतमत में नामजप व नादानुसंधान की क्रिया क्या है -महर्षि मेंहीं

प्रभु प्रेमियों ! सत्संग ध्यान के इस प्रवचन सीरीज में आपका स्वागत है। आइए आज जानते हैं-संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर S85, इसमें  बताया गया है कि  संतमत में नामजप व नादानुसंधान की क्रिया क्या है।  संतमत अर्थात वैसे संत है जो परम प्रभु परमात्मा की प्राप्ति करके, इस संसार को कुछ उपदेश दिए हैं । वैसे संतों की वाणी में नाम जप अर्थात नादानुसंधान की साधना क्या है? कैसे करें?  इन बातों पर गुरु महाराज बहुत खुलासा किए हैं इस प्रवचन में। इस प्रवचन के पहले भाग को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

पूज्यपाद गुरुदेव
पूज्यपाद गुरुदेव


प्रवचन चित्र 3
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प्रवचन समाप्त
प्रवचन समाप्त
प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि  संतमत में नामजप व नादानुसंधान की क्रिया क्या है  । इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का संका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी।


S85, (ख) संतमत में नामजप व नादानुसंधान की क्रिया क्या है -महर्षि मेंहीं S85, (ख) संतमत में नामजप व नादानुसंधान की क्रिया क्या है -महर्षि मेंहीं Reviewed by सत्संग ध्यान on 7/19/2018 Rating: 5

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