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S02, According to the saint, things of society and country interest, -महर्षि मेंहीं प्रवचन

महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" / 02

      प्रभु प्रेमियों ! आइए आज जानते हैं- संतमत सत्संग के महान प्रचारक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के भारती (हिंदी) प्रवचन संग्रह "महर्षि मेंहीं सत्संग सुधा सागर" के प्रवचन नंबर 02 रा, के बारे में। इसमें बताया गया है कि वेद, पुराण और संतमतानुसार, सत्संग की महिमा और ध्यान के फायदे के बारे में विशेष रूप से बताया है। इस प्रवचन के पहले वाला प्रवचन पढ़ने के लिए यहां दबाएं।

S02, According to the saint, things of society and country interest, -महर्षि मेंहीं प्रवचन। सत्संग की महिमा
सत्संग की महिमा

संतमतानुसार समाज और देशहित की बातें

सदगुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज कहते हैं कि- सत्संग में देश, काल और पात्र के हिसाब से यथा स्थान बैठना चाहिए। विभिन्न विचारधाराओं के विशेषज्ञ लोग ईश्वर भक्ति के बारे में नहीं जानते हैं। ईश्वर भक्ति से देश का बड़ा कल्याण होता है। संतमत में स्वाबलंबी होकर ईश्वर भक्ति करने के बात कही गई है। संसार में रहने का यह उत्तम तरीका है। हम कौन हैं ? जो हम हैं, वही ईश्वर है। सब लोग मिलजुल कर रहे हैं और ईश्वर भक्ति करें। पूरी जानकारी के लिए इस प्रवचन को पूरा पढें-


S02, According to the saint, things of society and country interest, -महर्षि मेंहीं प्रवचन। सत्संग की महिमा प्रवचन चित्र एक
सत्संग की महिमा प्रवचन चित्र एक

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सत्संग की महिमा प्रवचन चित्र दो

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सत्संग की महिमा प्रवचन चित्र 3

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सत्संग की महिमा प्रवचन चित्र 4

   प्रभु प्रेमियों ! गुरु महाराज के इस प्रवचन का पाठ करके आपलोगों ने जाना कि  समाज और देशहित की बातें। इतनी जानकारी के बाद भी अगर आपके मन में किसी प्रकार का शंका या कोई प्रश्न है, तो हमें कमेंट करें। इस प्रवचन के बारे में अपने इष्ट मित्रों को भी बता दें, जिससे वे भी लाभ उठा सकें। सत्संग ध्यान ब्लॉग का सदस्य बने। इससे आपको आने वाले प्रवचन या पोस्ट की सूचना नि:शुल्क मिलती रहेगी। 

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S02, According to the saint, things of society and country interest, -महर्षि मेंहीं प्रवचन S02, According to the saint, things of society and country interest, -महर्षि मेंहीं प्रवचन Reviewed by सत्संग ध्यान on 8/19/2019 Rating: 5

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